यूपीईएस में यूथ कनेक्ट कार्यक्रम ने युवाओं को स्वदेशी विकास, अनुसंधान और नवाचार के लिए किया प्रेरित
यूपीईएस में यूथ कनेक्ट कार्यक्रम ने युवाओं को स्वदेशी विकास, अनुसंधान और नवाचार के लिए किया प्रेरित
देहरादून, :- यूपीईएस में आयोजित यूथ कनेक्ट कार्यक्रम में लगभग 600 विद्यार्थियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान युवाओं, राष्ट्र निर्माण, भारतीय मूल्यों तथा वर्ष 2047 तक भारत की विकास यात्रा पर सार्थक संवाद हुआ। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को स्वदेशी विकास, अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता और जिम्मेदार नागरिकता के महत्व पर विचार करने के लिए एक प्रभावी मंच प्रदान किया।
कार्यक्रम में श्री मुकुल कनिटकर, शिक्षाविद्, प्रेरक वक्ता, लेखक एवं सामाजिक कार्यकर्ता ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने भारतीयता (भारतीय पहचान एवं मूल्यों) के महत्व तथा देश के विकास और परिवर्तन में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से विचार साझा किए।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए श्री मुकुल कनिटकर ने स्वदेशी विकास, अनुसंधान एवं नवाचार तथा स्वदेशी तकनीकों के विकास को वर्ष 2047 तक भारत की प्रगति में महत्वपूर्ण कारक बताया। उन्होंने विद्यार्थियों से पारंपरिक करियर विकल्पों से आगे बढ़कर उद्यमशील सोच विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं को केवल रोजगार पाने वाले बनने के बजाय रोजगार सृजक और उद्यमी बनने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
ज्ञान, नवाचार और आत्मनिर्भरता के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि युवा अपनी शिक्षा और कौशल को समाज तथा राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना से जोड़कर देश के विकास में सार्थक योगदान दे सकते हैं। विद्यार्थियों ने कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता की और वक्ता के साथ संवाद किया, जिससे यह सत्र अत्यंत प्रभावी और सार्थक बना।
इस अवसर पर श्री मनीष मदान, प्रो वाइस चांसलर – ऑपरेशंस एंड ग्रोथ इनिशिएटिव्स एवं रजिस्ट्रार, यूपीईएस ने कहा, “अनुसंधान और नवाचार हमारे युवा विद्यार्थियों की सोच का केंद्र होना चाहिए। यूपीईएस में हम अपने विद्यार्थियों को सही शिक्षा, मार्गदर्शन और मेंटरशिप प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि वे अपने विचारों को वास्तविक जीवन की चुनौतियों के समाधान में बदल सकें। हमारा मानना है कि अनुशासन, कड़ी मेहनत और सामाजिक जिम्मेदारी ऐसे भविष्य के नेतृत्वकर्ताओं के निर्माण के लिए आवश्यक हैं, जो भारत और विश्व के विकास में सार्थक योगदान दे सकें।”
कार्यक्रम में श्री मनीष मदान, प्रो वाइस चांसलर – ऑपरेशंस एंड ग्रोथ इनिशिएटिव्स एवं रजिस्ट्रार, यूपीईएस, डॉ. वीना दत्ता, प्रो वाइस चांसलर, यूपीईएस; प्रो. डी. के. गुप्ता; श्री धनंजय, विभाग प्रचारक; तथा डॉ. वैभव प्रताप सिंह, सहित विश्वविद्यालय के वरिष्ठ संकाय सदस्य एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को स्वदेशी नवाचार, उद्यमिता, अनुसंधान और युवा नागरिकों की जिम्मेदारियों से जुड़े विषयों पर संवाद का अवसर मिला। चर्चा में विद्यार्थियों को रचनात्मक सोच विकसित करने, स्थानीय आवश्यकताओं पर आधारित समाधान तैयार करने तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देने के अवसरों को तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
श्री लोकेंद्र शर्मा, प्रमुख, सरकारी संबंध एवं सामाजिक आउटरीच विभाग ने कार्यक्रम के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं श्री मनीष कुमार दुबे एवं डॉ. भालचंद्र शिंगण, कार्यक्रम संयोजकों ने कार्यक्रम की योजना एवं तैयारियों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. ध्रुव कुमार ने किया।
लगभग 600 विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता वाला यूथ कनेक्ट कार्यक्रम भारत के भविष्य, स्वदेशी विकास, नवाचार और उद्यमिता पर सार्थक संवाद का महत्वपूर्ण मंच बना। कार्यक्रम ने युवाओं को आवश्यक ज्ञान, आत्मविश्वास और मूल्यों से सशक्त बनाने के महत्व को रेखांकित किया, ताकि वे देश की विकास यात्रा में प्रभावी योगदान दे सकें।
यूथ कनेक्ट जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से यूपीईएस विद्यार्थियों को राष्ट्रीय महत्व के विषयों से जुड़ने, नवाचार आधारित सोच विकसित करने तथा भविष्य के उद्यमी, शोधकर्ता, नवप्रवर्तक और जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी क्षमता को पहचानने के लिए प्रोत्साहित करता है।
कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि आज के युवा वर्ष 2047 तक आत्मनिर्भर, नवाचारी और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

